इस महीने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान एक चरण में होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान 9 अप्रैल को निर्धारित है, तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 और 28 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतगणना 4 मई को की जाएगी।
चुनावों के नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां रैलियों को संबोधित कर रही हैं, घोषणापत्र जारी कर रही हैं और विभिन्न मतदाता समूहों के लिए विशेष वादे कर रही हैं। लगभग 17.4 करोड़ मतदाता इन पांच क्षेत्रों में मतदान करेंगे, और मतदान के लिए लगभग 2.19 लाख बूथ लगाए गए हैं।
चुनावों में रोजगार, महंगाई, सामाजिक कल्याण योजनाएं, शासन रिकॉर्ड, विकास वादे और क्षेत्रीय पहचान जैसी महत्वपूर्ण मुद्दों का असर मतदाताओं की सोच पर पड़ रहा है। सुरक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ की जा रही है। निर्वाचन आयोग पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर रहा है, खर्चों की कड़ी निगरानी कर रहा है और आचार संहिता के पालन को सुनिश्चित कर रहा है।
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चुनावी माहौल के तेज होते ही सर्वेक्षण (Opinion Polls) भी सामने आ रहे हैं। ये सर्वेक्षण पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में संभावित परिणामों का प्रारंभिक आकलन प्रदान कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया संस्थान इन सर्वेक्षणों के आधार पर चुनावी रुझानों और संभावित विजेताओं का अनुमान लगा रहे हैं।
इस तरह, मतदाता, पार्टियां और मीडिया सभी आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं।
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