विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारत की राजनीति का परिदृश्य बदल दिया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में आए परिणामों ने मतदाताओं की बदलती पसंद और नए राजनीतिक समीकरणों को उजागर किया है।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 206 सीटें हासिल कीं और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लंबे शासन का अंत कर दिया। टीएमसी को 80 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस और एजेयूपी को 2-2 सीटें तथा सीपीआई(एम) को सिर्फ 1 सीट मिली।
तमिलनाडु में अभिनेता-नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, बहुमत से पीछे रह गई। डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस और पीएमके को क्रमशः 5 और 4 सीटें मिलीं।
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असम में बीजेपी ने 126 में से 82 सीटें जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी। कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं, जबकि बीओपीएफ और एजीपी ने 10-10 सीटें हासिल कीं।
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार वापसी की। कांग्रेस को 63 सीटें मिलीं, जबकि सीपीआई(एम) को 26 सीटें हासिल हुईं।
पुडुचेरी में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) 12 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। डीएमके को 5, बीजेपी को 4 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिलीं। टीवीके ने भी 2 सीटों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि देश में राजनीति तेजी से बदल रही है और नए खिलाड़ी उभर रहे हैं।
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