दिल्ली की एक अदालत ने आज पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दरदा, व्यवसायी मनोज जयसवाल और पूर्व कोल सचिव पीसी पारखा को बंदर कोल ब्लॉक घोटाले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। इन तीनों को कोल ब्लॉक आवंटन में गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
कोल ब्लॉक घोटाला भारत के बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जाता है, जिसमें कई उच्च पदस्थ व्यक्तियों और कंपनियों पर सरकारी कोल ब्लॉक्स के अवैध आवंटन का आरोप था। विजय दरदा और मनोज जयसवाल पर यह आरोप था कि उन्होंने कोल ब्लॉक्स के आवंटन में अपनी प्रभावशाली स्थिति का गलत उपयोग किया था। वहीं, पूर्व कोल सचिव पीसी पारखा पर भी आरोप था कि उन्होंने अपनी स्थिति का फायदा उठाते हुए नियमों का उल्लंघन किया था।
हालांकि, अदालत ने इन तीनों को आरोपों से बरी करते हुए फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और निर्णायक साक्ष्य नहीं थे। इस फैसले के बाद आरोपियों ने राहत की सांस ली और उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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यह मामला वर्षों से अदालत में लंबित था और इस फैसले ने कोल ब्लॉक घोटाले से जुड़ी कई जटिलताओं को हल किया।
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