बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सह-अध्यक्ष और सदस्य वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर संगठन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। छह पन्नों के पत्र में रेड्डी ने भर्ती, फंड के प्रबंधन, नियुक्तियों, विधि महाविद्यालयों को मंजूरी और कानून छात्रों से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
रेड्डी ने कहा कि बीसीआई किसी व्यक्ति की निजी संस्था नहीं, बल्कि संसद के कानून से बना वैधानिक निकाय है। इसके फैसले देश के लाखों वकीलों और कानूनी पेशे में प्रवेश करने वाले छात्रों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत बताई।
150 करोड़ रुपये के फंड पर सवाल
रेड्डी ने बीसीआई ट्रस्ट और बीसीआई ट्रस्ट पर्ल-फर्स्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, 17 सितंबर 2020 को नया ट्रस्ट बनाया गया और बीसीआई के करीब 150 करोड़ रुपये उसमें स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आया। उन्होंने दावा किया कि कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद रकम ट्रांसफर की गई। रेड्डी ने बीसीआई और ट्रस्ट के खातों के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है।
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विधि कॉलेजों से कथित भुगतान का आरोप
रेड्डी ने आरोप लगाया कि नए विधि महाविद्यालयों की मंजूरी और पुराने कॉलेजों की मान्यता बढ़ाने के लिए 25 लाख से एक करोड़ रुपये तक के कथित “योगदान” की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर मामला बेहद गंभीर होगा और ऐसी किसी भी वित्तीय वसूली को तुरंत रोकना चाहिए।
नालसार विवाद का भी जिक्र
रेड्डी ने हैदराबाद स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय के 2026 बैच के छात्रों से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि छात्रों के विचार व्यक्त करने के कारण पूरे बैच को बार काउंसिल में नामांकन से रोकने का निर्देश उचित प्रक्रिया के बिना दिया गया। बाद में यह आदेश वापस लिया गया और मनन मिश्रा ने खेद जताया।
रेड्डी ने मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मिश्रा 2012 से अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं और 2025 में फिर चुने गए। उन्होंने 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने, बीसीआई की विशेष बैठक बुलाने, सभी संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और स्वतंत्र ऑडिट कराने समेत पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।
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