पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय के बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का फैसला किया है। यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में दोपहर 12 बजे निर्धारित है।
मुख्यमंत्री मान ने दिल्ली रवाना होने से पहले राष्ट्रपति को “भारत के संविधान की संरक्षक” बताया और कहा कि वे इस मुद्दे पर न्याय की मांग करेंगे। उनका आरोप है कि यह जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
आप को बड़ा झटका तब लगा जब उसके दस में से सात राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। इनमें राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। इनमें से छह सांसद पंजाब से हैं, जिससे राज्य की राजनीति पर गहरा असर पड़ा है।
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इन सांसदों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और विचारधारा से भटक गई है।
हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि केवल उन्हें राष्ट्रपति से मिलने का समय मिला है।
इससे पहले, आप के विधायक और मंत्री मुख्यमंत्री आवास पर एकत्र हुए और समर्थन दिखाने के लिए दिल्ली रवाना हुए। उन्होंने “पंजाब मान दे नाल” और “पंजाब के गद्दार” जैसे नारे वाले पोस्टर भी प्रदर्शित किए।
राज्य सरकार ने 1 मई को पारित विश्वास प्रस्ताव की प्रति भी राष्ट्रपति को सौंपने की तैयारी की है।
उधर, राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सातों सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है, जिससे उच्च सदन में आप की संख्या घटकर मात्र तीन रह गई है।
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