महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना एक बार फिर आमने-सामने नजर आ सकते हैं। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक यानी एमडीसीसीबी के आगामी चुनाव में शिंदे गुट पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है। इस बैंक पर फिलहाल बीजेपी का मजबूत प्रभाव माना जाता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रभाव वाले इस सहकारी बैंक पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी की नजर है। ठाणे-पालघर जिला बैंक चुनाव में मिली सफलता के बाद शिंदे गुट का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में पार्टी मुंबई के इस महत्वपूर्ण बैंक में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति बना रही है।
मौजूदा समय में 20 निदेशकों वाले बैंक के बोर्ड पर बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर और उनके समर्थकों का दबदबा है। बोर्ड में बीजेपी नेताओं प्रसाद लाड और तेजस्वी घोसालकर के अलावा ठाकरे गुट के विधायक सुनील राउत भी शामिल हैं। ऐसे में शिंदे सेना की सक्रियता बीजेपी के पुराने वर्चस्व के लिए चुनौती मानी जा रही है।
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सहकारी बैंक का चुनाव केवल वित्तीय नियंत्रण तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी संस्थाओं को जमीनी स्तर पर प्रभाव और राजनीतिक नेटवर्क मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की कार्यशील पूंजी करीब 10,282 करोड़ रुपये बताई गई है। बैंक हर साल लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये के होम लोन वितरित करता है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन तथा हाउसिंग सोसायटियों के सेल्फ-रीडेवलपमेंट के लिए भी बैंक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
ऐसे में बैंक पर नियंत्रण से मुंबई के बड़े मध्यमवर्गीय तबके और सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक पहुंच मजबूत हो सकती है।
हालांकि बीजेपी और शिंदे की शिवसेना राज्य सरकार में सहयोगी हैं, लेकिन आगामी बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों दलों के बीच सहकारी संस्थाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज होती दिख रही है। दोनों पार्टियां सहकारिता क्षेत्र के जरिए अपना राजनीतिक और आर्थिक आधार मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं।
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