बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन मुख्य दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगने के बाद राजनीतिक मैदान पूरी तरह खुल गया है और अब पूर्व सहयोगी रहे ये दोनों दल आमने-सामने हैं। मतदान 12 फरवरी को देश की 299 संसदीय सीटों पर होगा। यह चुनाव 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार हटने के बाद देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, BNP को इस मुकाबले में थोड़ा आगे माना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया द्वारा स्थापित यह पार्टी पहले भी सत्ता में रह चुकी है, इसलिए कुछ मतदाता इसे अनुभवी राजनीतिक ताकत मानते हैं। खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान लंबे निर्वासन के बाद सक्रिय राजनीति में लौटे हैं और पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी वापसी से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखा जा रहा है। खालिदा जिया के हालिया निधन से भी कुछ मतदाताओं में BNP के प्रति भावनात्मक समर्थन बढ़ा है।
BNP ने अपने चुनाव अभियान में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर जोर दिया है। पार्टी ने सत्ता में आने पर प्रशासनिक सुधार और स्थिर शासन का वादा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग के कुछ पारंपरिक वोट अब BNP की ओर जा सकते हैं।
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दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी भी मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं। शेख हसीना के कार्यकाल में प्रतिबंधित रही जमात को 2024 में अंतरिम सरकार ने फिर से पंजीकरण दिया। इसे उन युवाओं के नए राजनीतिक समूह का समर्थन भी मिला है, जिन्होंने हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाई थी।
अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के कारण “फ्लोटिंग वोट” निर्णायक साबित हो सकते हैं। दोनों पक्ष हिंदू समुदाय समेत अल्पसंख्यक मतदाताओं को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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