विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने 737 मैक्स विमान के नेविगेशन सिस्टम में एक सॉफ्टवेयर समस्या की पहचान की है। कंपनी के मुताबिक, खास परिस्थितियों में लैंडिंग के दौरान इस गड़बड़ी से पायलटों पर काम का दबाव बढ़ सकता है। इसके कारण बोइंग के नए नैरोबॉडी विमानों के प्रमाणन और सेवा में शामिल होने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
बोइंग ने बताया कि पिछले महीने उसने दुनिया भर में 737 मैक्स संचालकों को इस सॉफ्टवेयर समस्या की जानकारी दी थी। कंपनी के अनुसार, एक विशेष लैंडिंग परिस्थिति में पायलटों को स्वचालित उड़ान मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं हो सकता है। बोइंग ने कहा कि उसने विमान संचालकों को मौजूदा पायलट प्रक्रियाओं की जानकारी दोबारा दी है, ताकि ऐसी स्थिति में सुरक्षित तरीके से विमान को संभाला जा सके।
यह समस्या उस समय सामने आ सकती है जब पायलट किसी लैंडिंग प्रयास को रद्द करने यानी गो-अराउंड का फैसला करता है। कंपनी के मुताबिक, ऐसी स्थिति में विमान का ऑटोपायलट पिच नियंत्रण के लिए अपेक्षाकृत सरल ऑटोमेशन मोड में चला जाता है। इससे सामान्य संचालन की तुलना में पायलट पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ सकता है।
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अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने भी कहा है कि वह इस मामले की समीक्षा के लिए एक बोर्ड गठित कर रहा है। बोर्ड यह निर्धारित करेगा कि सॉफ्टवेयर समस्या विमान की उड़ान सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है या नहीं।
अगर एफएए इसे सुरक्षा संबंधी समस्या मानता है, तो बोइंग के नए 737 मैक्स 10 के प्रमाणन में देरी हो सकती है। हाल ही में मंजूर किए गए मैक्स 7 को सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पहले इस सॉफ्टवेयर समस्या और बोइंग के प्रमाणन कार्यक्रम पर इसके संभावित प्रभाव की रिपोर्ट की थी।
बोइंग ने कहा कि स्थायी समाधान पहले 2028 तक तैयार करने की योजना थी, लेकिन कंपनी इसे जल्द पूरा करने के प्रयास कर रही है। तब तक 737 मैक्स संचालकों के पायलटों के लिए एक दिशानिर्देश भी तैयार किया जा रहा है।
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