नई दिल्ली में ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीशों के मंच की शुरुआत हो गई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मेजबानी में आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 4 से 6 सितंबर तक चलेगा। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालयों के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
मंच का उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिका के बीच संवाद, सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को मजबूत करना है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में न्यायिक संस्थाओं के सामने आने वाली साझा चुनौतियों, कानून के शासन और न्याय तक पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए यह मंच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों के न्यायिक प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग और दोनों देशों की न्याय प्रणालियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
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ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में समूह का विस्तार हुआ है और इसके साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। न्यायिक सहयोग इस व्यापक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में न्यायिक संस्थाओं के सामने साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, सीमा-पार अपराध और नागरिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
तीन दिवसीय बैठक के दौरान न्यायिक प्रणालियों में तकनीक के इस्तेमाल, न्यायिक प्रशासन और संस्थागत सहयोग समेत कई विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद है। विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद से सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और अनुभवों को साझा करने का अवसर मिलेगा।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मंच की मेजबानी देश की न्यायपालिका की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है। 6 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में साझा अनुभवों और भविष्य के सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा जारी रहेगी।
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