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जुलाई 2026 में भारत के वस्तु निर्यात में करीब 20% की तेज बढ़ोतरी, पश्चिम एशिया में कारोबार में सुधार

जुलाई 2026 में भारत के वस्तु निर्यात में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पश्चिम एशिया में निर्यात भी सुधरा, लेकिन सेवाओं के बढ़ते आयात से व्यापार घाटा 15 अरब डॉलर पहुंचा।

भारत के वस्तु निर्यात में जुलाई 2026 के दौरान करीब 20 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल के बावजूद भारत का निर्यात आयात की तुलना में तेजी से बढ़ा। गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

जुलाई में भारत के निर्यात प्रदर्शन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि पश्चिम एशिया के बाजारों में भी सुधार देखने को मिला। इस क्षेत्र में भारत का निर्यात जुलाई 2025 की तुलना में करीब 9 प्रतिशत अधिक रहा।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, पश्चिम एशिया में व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपने माल की आवाजाही के लिए अलग-अलग बंदरगाहों और शिपिंग लाइनों का इस्तेमाल किया। इससे क्षेत्र में जारी संकट के बीच आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने में मदद मिली और निर्यात में सुधार संभव हुआ।

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भारत के लिए पश्चिम एशिया एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र है। क्षेत्र में तनाव और परिवहन संबंधी चुनौतियों के बावजूद निर्यात में बढ़ोतरी को भारतीय व्यापार के विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, निर्यात में मजबूत वृद्धि के बावजूद भारत के कुल व्यापार संतुलन पर दबाव बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में देश का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 15 अरब डॉलर हो गया। इसकी प्रमुख वजह सेवाओं के आयात में तेज वृद्धि बताई गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सेवाओं के आयात की वृद्धि दर सेवाओं के निर्यात से अधिक रही। इसके चलते वस्तु निर्यात में मजबूत प्रदर्शन के बावजूद कुल व्यापार घाटा बढ़ गया।

सरकार और व्यापार जगत के लिए जुलाई के आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पश्चिम एशिया में संकट के बीच भारत ने अपने निर्यात बाजारों और परिवहन मार्गों में विविधता लाने की कोशिश की है। अलग-अलग बंदरगाहों और शिपिंग मार्गों के इस्तेमाल से निर्यातकों को आपूर्ति संबंधी बाधाओं से निपटने में मदद मिली।

वस्तु निर्यात में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। हालांकि, आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, माल ढुलाई की लागत और सेवाओं के आयात का रुख भारत के व्यापार संतुलन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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