कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में अपने संबोधन के दौरान वैश्विक कूटनीति को लेकर एक अहम और सख्त संदेश दिया। दावोस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” में अब गंभीर दरार आ चुकी है और दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और पुराने नियम कमजोर पड़ते जा रहे हैं।
कार्नी ने कहा, “मजबूत वही करता है जो वह कर सकता है, और कमजोर वही सहता है जो उसे सहना पड़ता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई संक्रमण काल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में वास्तविक टूट है। उनके अनुसार, पुरानी व्यवस्था अब वापस नहीं आने वाली और उसके लिए शोक मनाना किसी रणनीति का विकल्प नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कनाडा जैसे देशों को पुराने अमेरिकी प्रभुत्व वाली व्यवस्था से लाभ जरूर मिला, जिसमें खुले समुद्री मार्ग, स्थिर वित्तीय प्रणाली, सामूहिक सुरक्षा और विवाद समाधान की संरचनाएं शामिल थीं। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने इसे “महाशक्तियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का युग” बताया, जहां आर्थिक एकीकरण को दबाव और हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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मध्यम शक्तियों को चेतावनी देते हुए कार्नी ने कहा कि अब यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि केवल नियमों का पालन करने से सुरक्षा मिल जाएगी। उन्होंने कहा, “मध्यम शक्तियों को साथ मिलकर काम करना होगा, क्योंकि अगर हम बातचीत की मेज़ पर नहीं होंगे, तो हम मेन्यू में होंगे।”
अपने भाषण में कार्नी ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के समर्थन का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि कनाडा ग्रीनलैंड के भविष्य को तय करने के उसके अधिकार का पूरा समर्थन करता है। यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मंशा जताने के बाद आया है।
कार्नी के इस भाषण को दावोस में मौजूद वैश्विक नेताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर सराहा।
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