दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा कराई गई विभिन्न अध्ययनों की एक व्यापक समीक्षा में यह सामने आया है कि सर्दियों के मौसम में दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण ‘सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर’ है। यह कुल शीतकालीन प्रदूषण में करीब 27 प्रतिशत का योगदान देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद परिवहन क्षेत्र 23 प्रतिशत के साथ दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषण स्रोत है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, डीजल और पेट्रोल इंजन से उत्सर्जन तथा ट्रैफिक जाम के दौरान बढ़ा प्रदूषण दिल्ली की हवा को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि बायोमास जलाना तीसरे स्थान पर है, जिसका योगदान लगभग 20 प्रतिशत है। इसमें नगर निगम के ठोस कचरे को जलाना और पराली जलाने की घटनाएं शामिल हैं। खासतौर पर सर्दियों के दौरान पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष जलाने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर बड़ा असर पड़ता है।
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धूल को भी प्रदूषण का एक अहम स्रोत बताया गया है, जिसका योगदान लगभग 15 प्रतिशत है। निर्माण कार्य, टूटी सड़कों और खुले इलाकों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण स्तर को और बढ़ा देती है। वहीं, औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण 9 प्रतिशत तक आंका गया है।
CAQM ने बुधवार देर रात (21 जनवरी, 2026) सार्वजनिक की गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मेटा-विश्लेषण का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण के स्रोतों को लेकर एक समान और सर्वसम्मत दृष्टिकोण विकसित करना है। आयोग के अनुसार, इससे मौजूदा आंकड़ों और प्रभावी नीतियों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जा सकें।
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