नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिष्ठित आनुवंशिकी वैज्ञानिक के. थंगराज को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। के. थंगराज सीएसआईआर-भातनागर फेलो हैं और हैदराबाद स्थित केंद्र फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) में कार्यरत हैं।
के. थंगराज पिछले तीन दशकों से अधिक समय से सीसीएमबी में कार्य कर रहे हैं। अपने लंबे वैज्ञानिक करियर में उन्होंने भारत की जनसंख्या की उत्पत्ति, आनुवंशिक संरचना और प्रवासन पैटर्न पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है। उनके शोध ने भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न जनसमूहों के निर्माण और विविधता को समझने में अहम भूमिका निभाई है।
उनके अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत की आबादी विभिन्न ऐतिहासिक प्रवासन और मिश्रण प्रक्रियाओं का परिणाम है, जिसने देश की आनुवंशिक विविधता को आकार दिया है। उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है।
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समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई व्यक्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। के. थंगराज का नाम उन वैज्ञानिकों में शामिल है जिन्होंने भारतीय विज्ञान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
वैज्ञानिक समुदाय में के. थंगराज को एक ऐसे शोधकर्ता के रूप में जाना जाता है जिन्होंने जटिल आनुवंशिक आंकड़ों के माध्यम से मानव इतिहास और जनसंख्या विज्ञान को समझने में नई दिशा दी है। उनके कार्यों ने चिकित्सा विज्ञान और मानव आनुवंशिकी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनके सम्मानित होने पर वैज्ञानिक समुदाय और सीसीएमबी संस्थान में खुशी का माहौल है। यह पुरस्कार भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करता है।
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