छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 25 वर्षीय युवक सनत कुमार कश्यप को एक फोन कॉल आया, जिसमें उसे पुलिस का होना बताया गया। कॉल करने वाले ने कड़ा लहजा अपनाते हुए युवक पर आरोप लगाया कि उसके पास एक महिला के बारे में जानकारी है जो कथित रूप से किसी पुरुष के साथ भाग गई थी। युवक को चेतावनी दी गई कि सहयोग नहीं किया तो कार्रवाई होगी।
कुछ ही घंटों बाद सनत कुमार कश्यप ने आत्महत्या कर ली।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि कॉल करने वाला कोई पुलिस अधिकारी नहीं बल्कि 30 वर्षीय ड्राइवर सचिन खरे था। खरे को अब व्यक्ति बनकर पुलिस का दिखावा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
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पुलिस के अनुसार खरे की 21 वर्षीय बहन लापता थी और संदेह था कि वह किसी पुरुष के साथ भाग गई थी, जो कश्यप का मित्र था। खरे को शक था कि कश्यप के पास उसकी बहन के बारे में जानकारी हो सकती है, इसलिए उसने कश्यप को कॉल कर उससे बहन के बारे में पूछताछ की। इस दौरान खरे ने खुद को बालोदा पुलिस स्टेशन के पंतोरा आउटपोस्ट का पुलिस अधिकारी बताया।
यह मामला छत्तीसगढ़ में झूठे पुलिस कॉल और दबाव के चलते हुई आत्महत्या का उदाहरण है। पुलिस ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आगे की जांच जारी है और इस घटना से सबक लेते हुए लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर विश्वास न करें।
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