नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से 460 से अधिक लोगों की मौत के दो दिन बाद शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन क्षेत्र में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। चीन के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:13 बजे आया और इसके झटके लोंगचांग में महसूस किए गए।
चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र 29.23 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 105.22 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। इसकी गहराई करीब 13 किलोमीटर बताई गई है। हालांकि, शुरुआती जानकारी में भूकंप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में बाढ़ से तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि नेपाल में मृतकों की संख्या 469 तक पहुंच गई है। प्रभावित इलाकों से 499 स्थानीय निवासियों और 555 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है।
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अधिकारियों ने अगले तीन दिनों में भारी बारिश के कारण एक झील से दोबारा बाढ़ आने का खतरा जताया है। इसी वजह से चीन ने तिब्बत में बचाव अभियान फिलहाल रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक सभी बचाव दलों को आगे के निर्देश तक अपने स्थान पर रुकने को कहा गया है। पहले प्रभावित क्षेत्र में पहुंच चुकी आपातकालीन टीमों को भी एक किलोमीटर पीछे हटने का आदेश दिया गया है।
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने की उच्चस्तरीय बैठक
गंभीर स्थिति के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार को शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में तिब्बत में बचाव अभियान, नेपाल को आपात सहायता और अंतरराष्ट्रीय राहत सहयोग पर चर्चा हुई।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने कहा कि देश और विदेश में लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। अधिकारियों ने ग्लेशियरों, बर्फीली झीलों और भूस्खलन जैसे भूगर्भीय खतरों को लेकर भी चेतावनी दी।
तिब्बत में बांध टूटने का दावा
नेपाल ने दावा किया है कि तिब्बत में एक बांध टूट गया है और बचाव अभियान में लगे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है। हालांकि, चीन की ओर से अभी इस दावे पर आधिकारिक बयान नहीं आया है।
नेपाल पुलिस ने कहा कि तिब्बती क्षेत्र में एक जल बांध के फिर टूटने की सूचना मिली है। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों, राहत एवं बचाव दलों तथा आम लोगों को सतर्क रहने और तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश दिया गया है।
नेपाल और चीन के बीच बाढ़ के कारणों को लेकर पहले भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। नेपाल ने समय पर जानकारी नहीं मिलने की शिकायत की थी, जबकि चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दोनों देशों से राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करने की अपील की थी।
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