तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन के अंदर और बाहर जमकर राजनीतिक हंगामा हुआ। कांग्रेस ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता ताता मधु पर विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। वहीं, ताता मधु ने ऐसी कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सदन में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव से माफी मांगने की मांग की। मुख्यमंत्री ने टिप्पणी के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे बीआरएस नेता के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह का आचरण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की।
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दलित स्पीकर का अपमान करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि गद्दम प्रसाद कुमार दलित समुदाय से आते हैं और कथित टिप्पणी उनके विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर की गई। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विधायकों ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर ताता मधु के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधान परिषद सदस्य ताता मधु को तत्काल निलंबित करने की मांग की और विरोध में उनका पुतला भी जलाया।
काले टी-शर्ट में पहुंचे बीआरएस नेता
इस बीच विधानसभा के बाहर भी बीआरएस और पुलिस के बीच टकराव हुआ। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। वे कांग्रेस सरकार के 1,000 दिन पूरे होने के विरोध में काली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे।
मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को बीआरएस विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से नहीं रोकने का निर्देश दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
कांग्रेस जहां कथित टिप्पणी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं बीआरएस सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगा रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान यह राजनीतिक टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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