भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन का मानना है कि जहां 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन बेहद अहम है, वहीं हॉकी विश्व कप का अपना अलग और विशाल ऐतिहासिक व भावनात्मक महत्व भी है। उन्होंने कहा कि चुनौती यह है कि विश्व कप और एशियन गेम्स – दोनों के लिए सर्वश्रेष्ठ टीम तैयार की जाए और दोनों प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया जाए।
क्रेग फुल्टन ने अप्रैल 2023 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम की कमान संभाली थी। उनके लिए पहला बड़ा असाइनमेंट हांगझोउ एशियन गेम्स था, जहां दक्षिण अफ्रीका के इस कोच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। यह उपलब्धि उनके कोचिंग करियर और भारतीय हॉकी के लिए एक अहम मोड़ साबित हुई।
हालांकि, इस बार चुनौती कहीं अधिक कठिन है। महज तीन सप्ताह के अंतराल में भारत को दो बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है। अगस्त में एफआईएच हॉकी विश्व कप खेला जाएगा, जबकि सितंबर में एशियन गेम्स आयोजित होंगे। एशियन गेम्स न केवल प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हैं, बल्कि 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन का सीधा रास्ता भी है।
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51 वर्षीय फुल्टन ने स्वीकार किया कि इतने कम समय में टीम से दोनों प्रतियोगिताओं में शिखर प्रदर्शन की उम्मीद करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की फिटनेस, मानसिक मजबूती और सही टीम संयोजन इस दौर में बेहद अहम होंगे। कोच के अनुसार, टीम प्रबंधन को रणनीतिक रूप से खिलाड़ियों का उपयोग करना होगा ताकि वे थकान और दबाव से निपट सकें।
फुल्टन ने यह भी कहा कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि इसका भारतीय हॉकी के इतिहास और प्रशंसकों की भावनाओं से गहरा संबंध है। इसलिए उनका लक्ष्य यही है कि भारत दोनों प्रतियोगिताओं में संतुलित और प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करे और देश को गर्व महसूस कराए।
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