केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी दी कि वर्ष 2026 के पहले 74 दिनों में पूरे देश में कुल 170 कस्टोडियल मौतें हुई हैं। ये आंकड़े पुलिस और जेलों में बंद लोगों की मौतों से संबंधित हैं। सरकार ने कहा कि इनमें से अधिकांश मामलों में मौतों की जांच जारी है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में कस्टोडियल मौतों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रही। गृह मंत्रालय ने बताया कि पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत में मौतों की रिपोर्टिंग में सुधार के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि कस्टोडियल मौतों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जा रहा है। इसमें रिमांड और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच, वीडियो रिकॉर्डिंग और वरिष्ठ अधिकारियों की समय-समय पर निरीक्षण शामिल है।
और पढ़ें: मध्य पूर्व संकट पर चर्चा के लिए सरकार ने 25 मार्च को सभी दलों की बैठक बुलाई
वर्तमान आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि हिरासत में मौतें अभी भी एक गंभीर समस्या हैं। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से कहा है कि इस मुद्दे पर अधिक पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल रिपोर्टिंग बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हिरासत में व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नीतियां बनाना भी जरूरी है।
सरकार ने आश्वासन दिया कि कस्टोडियल मौतों की जांच में विलंब नहीं होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए नियमों का पालन किया जाएगा।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया तनाव पर CCS बैठक की अध्यक्षता की, भारत को प्रभाव से बचाने पर जोर