भारतीय सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के लिए 10 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस खरीद परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अपनी निगरानी और खुफिया क्षमताओं का विस्तार कर रही हैं। MALE ड्रोन लंबे समय तक हवा में रहकर समुद्री क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने में सक्षम होते हैं।
इस रक्षा सौदे में देश की प्रमुख कंपनियों के शामिल होने की संभावना है। अडानी समूह, सोलर ग्रुप और टाटा समूह जैसी कंपनियां इस टेंडर के लिए बोली लगाने की तैयारी कर सकती हैं। इन कंपनियों ने पहले भी रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और एयरोस्पेस तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स में रुचि दिखाई है।
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MALE ड्रोन अत्याधुनिक सेंसर, कैमरा सिस्टम और निगरानी उपकरणों से लैस होते हैं। इनकी मदद से समुद्र में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, तस्करी रोकने, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक निगरानी अभियानों को मजबूती मिलेगी।
भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तटरक्षक बल अपनी निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है।
रक्षा मंत्रालय की यह पहल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल करने से भारतीय सुरक्षा बलों की वास्तविक समय में निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित कंपनी को ड्रोन की आपूर्ति, प्रशिक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय तकनीकी मूल्यांकन और बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
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