रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (15 फरवरी, 2026) को कोयम्बटूर में महाशिवरात्रि उत्सव के दौरान भव्या भारत भूषण पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित किया। यह पुरस्कार ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव द्वारा स्थापित किए गए थे।
हालांकि, इस समारोह में रक्षा कर्मियों की यूनिफॉर्म में उपस्थिति ने विवाद को जन्म दिया, क्योंकि कई सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। सेवानिवृत्त मेजर जनरल बी.एस. धनोआ ने कहा कि सैन्य अधिकारी निजी आयोजनों में शिरकत कर सकते हैं, लेकिन उन्हें यह यूनिफॉर्म में नहीं करना चाहिए।
यह घटना उस समय हुई जब रक्षा मंत्री समारोह में शामिल हो रहे थे और सैन्यकर्मियों ने भी इसमें भाग लिया था। कई सेवानिवृत्त अधिकारियों ने इसे अनुशासनहीनता और सैन्य गरिमा के खिलाफ माना। उनका कहना था कि यह भारतीय सेना की छवि को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि एक सैन्य अधिकारी की पहचान उसकी यूनिफॉर्म से होती है, और उसे केवल सरकारी या सैन्य कार्यों के दौरान पहनना चाहिए।
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हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि अगर कोई सैन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से समारोह में शामिल हो, तो उन्हें यूनिफॉर्म पहनने की आवश्यकता नहीं है। इस विवाद ने सैन्य अधिकारियों और सरकारी कार्यक्रमों में शिरकत करने की दिशा में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में रक्षा मंत्रालय या किसी अन्य सरकारी अधिकारी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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