दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु ने राजधानी में व्यवसाय सुगमता सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का दृष्टिकोण पारंपरिक नियमों से हटकर 'पर्मिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड' (अनुमत जब तक प्रतिबंधित न हो) प्रणाली की ओर है।
एलजी संधु ने कहा कि सरकार का व्यापक लक्ष्य लंबे समय से चल रहे नियामक अड़चनों को हटाकर और शासन ढांचे को सरल बनाकर एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है जिसमें व्यवसाय करना आसान हो। उन्होंने बताया कि इस बदलाव के माध्यम से निवेशकों और उद्यमियों को नई पहलों को लागू करने में आसानी होगी और वे जटिल कानूनी प्रक्रियाओं में फंसे बिना काम कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार इस दिशा में कई सुधारों पर काम कर रही है, जिनमें डिजिटलाइजेशन, अनुमतियों की प्रक्रिया में सरलता, और पारदर्शिता बढ़ाना शामिल है। उपराज्यपाल ने जोर दिया कि राज्य में 'पर्मिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड' दृष्टिकोण अपनाने से न केवल व्यवसाय बढ़ेंगे, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
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सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी उद्यमी या नागरिक नई पहल शुरू करने में डर महसूस न करे और केवल उन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए जो स्पष्ट रूप से कानून द्वारा निषिद्ध हों।
इस पहल से दिल्ली में निवेश और व्यवसाय दोनों को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य को देश में सबसे व्यवसाय-अनुकूल केंद्र शासित प्रदेश बनाने में मदद करेगा।
उपरोक्त सुधारों और दृष्टिकोण के माध्यम से दिल्ली प्रशासन पारंपरिक जटिल नियमों को चुनौती देकर अधिक सहज और विकासोन्मुखी वातावरण तैयार करने की दिशा में अग्रसर है।
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