दिल्ली हाईकोर्ट ने गर्भवती महिलाओं के लिए ऑनलाइन लोअर बर्थ यानी निचली सीट बुक करने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) से जवाब मांगा है।
याचिका में मौजूदा रेलवे आरक्षण व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए विचार किए जाने के योग्य माना जाता है। हालांकि, यह सुविधा सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रक्रिया में ऐसी सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे गर्भवती महिला यात्री अपनी स्थिति के अनुसार निचली बर्थ का विकल्प चुन सकें।
याचिका में तर्क दिया गया है कि मौजूदा व्यवस्था में पात्रता होने के बावजूद ऑनलाइन आरक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ सुनिश्चित करने या प्राथमिकता देने की स्पष्ट और प्रभावी सुविधा नहीं है। इससे यात्रा के दौरान उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र और आईआरसीटीसी से इस संबंध में उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अदालत यह भी देखेगी कि वर्तमान रेलवे नियम गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ आवंटन को किस तरह लागू करते हैं और ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में इसमें क्या बदलाव संभव हैं।
याचिका में रेलवे की मौजूदा नीति और डिजिटल आरक्षण व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल की मांग की गई है, ताकि गर्भवती यात्रियों के लिए आरक्षण प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सके।
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