दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को नोटिस जारी किया। अदालत ने हादसे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ऐसी त्रासदियां हर दूसरे साल नहीं होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने अधिकारियों से दिल्ली में संचालित पीजी में रहने वाले छात्रों की संख्या का अलग-अलग ब्योरा मांगा। अदालत ने डीयू से यह भी पूछा कि दाखिला लेने वाले कितने छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
पीजी के निर्माण पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्र, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि फंसे लोगों को बचाने के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए।
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हालांकि, अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि दिल्ली में बिना अनुमति और निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए ऐसे पीजी कैसे बनाए जा रहे हैं। पीठ ने बचाव अभियान में तेजी लाने और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के प्रयास दोगुने करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। पीठ ने पीजी में रहने वाले युवा छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पर्याप्त संख्या में छात्रावास नहीं होने के कारण छात्रों को खतरनाक पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
25 सितंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की।
हादसे के बाद पीजी मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पांच एमसीडी अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटना ने दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा, पीजी के संचालन और नागरिक एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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