दिल्ली में बढ़ते वाहन प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार आवश्यक हो गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने हाल ही में केंद्र सरकार के साथ राजधानी में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर हुई एक अहम बैठक में यह सिफारिश रखी। इस दौरान चीन की राजधानी बीजिंग का उदाहरण देते हुए कहा गया कि दिल्ली मेट्रो को अपने मौजूदा परिचालन नेटवर्क से दोगुना से भी अधिक विस्तार करना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, CAQM ने सुझाव दिया है कि दिल्ली मेट्रो, जो वर्तमान में औसतन प्रतिदिन 65 से 70 लाख यात्रियों को सेवाएं देती है, अपने नेटवर्क को 20 से 30 लाइनों तक बढ़ा सकती है, जिनमें 450 से 500 स्टेशन शामिल हों। इससे अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगेगा।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 462.7 किलोमीटर है, जिसमें से 352.16 किलोमीटर हिस्सा चालू है, जबकि शेष 110.6 किलोमीटर में निर्माण कार्य जारी है। इस नेटवर्क में फिलहाल 12 लाइनें और 289 स्टेशन हैं, जो दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे पड़ोसी शहरों को भी जोड़ते हैं।
और पढ़ें: केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को दी मंजूरी
इसके मुकाबले बीजिंग का मेट्रो नेटवर्क कहीं अधिक व्यापक है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, बीजिंग में लगभग 879 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क है, जिसमें 27 लाइनें और 420 स्टेशन शामिल हैं। CAQM का मानना है कि बीजिंग जैसे बड़े शहर में मेट्रो नेटवर्क के व्यापक विस्तार ने वहां निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण नियंत्रण में मदद की है।
आयोग का तर्क है कि यदि दिल्ली को भी दीर्घकालिक समाधान चाहिए, तो मेट्रो नेटवर्क के आक्रामक विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और अंतिम छोर तक परिवहन सुविधा पर गंभीरता से काम करना होगा।
और पढ़ें: ठंड और प्रदूषण से समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ा, डॉक्टरों की चेतावनी