दिल्ली सरकार ने राजधानी में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। सरकार के अनुसार, ओखला, भलस्वा और गाजीपुर स्थित तीन प्रमुख लैंडफिल स्थलों पर करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के जरिए लगभग 100 एकड़ जमीन को कचरे के ढेर से मुक्त कर दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने राजधानी के पुराने कचरा पहाड़ों को कम करने और लैंडफिल स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने पर जोर दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ओखला लैंडफिल में करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है, जबकि भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल में भी बड़े पैमाने पर कचरे को हटाने और प्रसंस्करण का काम किया गया है।
दिल्ली में लंबे समय से ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौती बने हुए थे। इन स्थानों पर वर्षों से जमा कचरे के कारण आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। इसके अलावा कचरे के पहाड़ों से आग लगने और जहरीले धुएं की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
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सरकार का कहना है कि लैंडफिल से कचरा हटाने के साथ-साथ इससे मुक्त हुई जमीन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से पर्यावरण पर दबाव कम करने और दिल्ली की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन की योजना इन तीनों प्रमुख लैंडफिल स्थलों पर बचे हुए कचरे के प्रसंस्करण का काम आगे भी जारी रखने की है। इसके साथ ही नए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य राजधानी को कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ों से मुक्त कर स्वच्छ और अधिक टिकाऊ शहर बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, लैंडफिल स्थलों से जमीन की पुनर्प्राप्ति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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