प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस से नक्सलवाद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
यह विवाद 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने जंगलों से सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता हासिल की है, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अब भी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी विचारधारा वाले लोग पहले सरकार की समितियों और नीति निर्माण जैसे प्रभावशाली क्षेत्रों में अपनी जगह बना चुके थे।
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के अगले दिन पी. चिदंबरम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहलाने पर गर्व है। उनके इसी बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया।
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भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी के 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया दी और खुद को ‘दिमागी नक्सली’ शब्द से जोड़ लिया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नक्सलवाद संबंधी आकलन को सही मानती है या चिदंबरम के मौजूदा बयान को।
त्रिवेदी ने मनमोहन सिंह के अप्रैल 2006 के बयान का उल्लेख किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया था।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर भी नक्सलवाद से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने 2010 के दंतेवाड़ा हमले सहित नक्सली हिंसा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में नक्सलवाद का प्रभाव देश के कई हिस्सों में था।
त्रिवेदी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का दायरा काफी कम हुआ है। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए पुराने ‘लाल गलियारे’ की तुलना मौजूदा स्थिति से की।
वहीं, चिदंबरम ने ‘दिमागी नक्सली’ को भाजपा का नया राजनीतिक लेबल बताया था। उन्होंने इसे पहले इस्तेमाल किए गए ‘अर्बन नक्सल’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों की कड़ी का हिस्सा बताया।
इस तरह दोनों दलों के बीच विवाद अब नक्सलवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक शब्दावली और दोनों सरकारों के रिकॉर्ड पर बहस में बदल गया है।
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