तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) राज्य विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से 10 सीट पीछे रह गई। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) को 59 और अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) को 47 सीटें मिली हैं।
राजनीतिक गलियारों में अब डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है, ताकि टीवीके को सत्ता से दूर रखा जा सके। वहीं विजय ने दूसरी बार राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि राज्यपाल ने कथित तौर पर उनसे कहा कि टीवीके के पास अभी बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं और उन्हें जरूरी समर्थन के साथ दोबारा आने को कहा गया।
इसके बाद डीएमके ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई, जबकि एआईएडीएमके के करीब 47 विधायक पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहरे रहे। डीएमके नेताओं ने कहा कि जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन कोई भी राजनीतिक फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
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इस बयान के बाद डीएमके और एआईएडीएमके के बीच समझौते की अटकलें और तेज हो गईं। सूत्रों के अनुसार, एआईएडीएमके महासचिव एडप्पडी के पलानीस्वामी ने विधायकों से एकजुट रहने को कहा और “अच्छी खबर” आने का संकेत दिया।
उधर टीवीके नेताओं को आशंका है कि उन्हें सत्ता से दूर रखने के लिए राजनीतिक साजिश रची जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यदि डीएमके और एआईएडीएमके गठबंधन कर सरकार बनाते हैं तो टीवीके विधायक सामूहिक इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विजय मुख्यमंत्री बन पाएंगे या नहीं।
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