भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ बैठक हुई। यह बैठक आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच हुई। आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि SIR समेत उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं को नाम के पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है, उन्हें अब अनिवार्य रूप से चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित बूथ स्तर अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेगा और उन्हें ECINet पर अपलोड करेगा।
आयोग ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ERO मतदाता की सुनवाई निर्धारित कर सकता है। ऐसी सुनवाई यथासंभव ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है।
और पढ़ें: एचडी कुमारस्वामी ने SIR विवाद पर चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण
जिला निर्वाचन अधिकारियों को रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क तथा विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
गोवा में घर-घर पहुंचेंगे BLO
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने छूटे हुए मतदाताओं से फॉर्म एकत्र करने के लिए BLO को घर-घर जाने का निर्देश दिया है। आयोग के अनुसार 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं।
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी गई है, जबकि महाराष्ट्र में यह अवधि 12 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है।
आयोग ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
और पढ़ें: 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक, चुनाव आयोग और SIR पर होगी चर्चा