आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय लचीलेपन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सख्त वित्तीय लक्ष्यों को कुछ समय के लिए टालना उचित होगा। सर्वेक्षण के अनुसार, सरकार को अस्थिर और अप्रत्याशित भू-राजनीतिक तथा भू-अर्थिक माहौल में अपनी राजकोषीय नीतियों को बेहतर ढंग से समायोजित करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश की जरूरत है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा तैयार यह सर्वेक्षण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया। इसमें कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद केंद्र सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे के अनुपात में उल्लेखनीय सुधार किया है और निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में प्रतिबद्धता दिखाई है। हालांकि, इसके साथ ही सर्वेक्षण ने राज्यों को चेतावनी दी है कि इस अवधि में उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है।
सर्वेक्षण के अनुसार, राज्यों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारणों में राजस्व में गिरावट और व्यय में वृद्धि शामिल है। विशेष रूप से बिना शर्त नकद हस्तांतरण (अनकंडीशनल कैश ट्रांसफर) पर बढ़ते खर्च ने राज्यों के बजट पर दबाव बढ़ाया है। इससे न केवल उनके राजकोषीय घाटे में इजाफा हुआ है, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता भी प्रभावित हुई है।
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आर्थिक सर्वेक्षण ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार को फिलहाल राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत तय किए गए सख्त लक्ष्यों में लचीलापन रखना चाहिए। इससे सरकार को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत फैसले लेने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
साथ ही, सर्वेक्षण ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपने वित्तीय प्रबंधन में सुधार करें, राजस्व बढ़ाने के उपाय तलाशें और खर्च को अधिक विवेकपूर्ण ढंग से संचालित करें, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति दीर्घकाल में मजबूत हो सके।
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