अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के उद्देश्य से बनाए गए अपने प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” के लिए देशों से स्थायी सदस्यता के बदले एक अरब डॉलर तक का योगदान मांगा है। एएफपी द्वारा देखे गए इसके चार्टर के अनुसार, यह बोर्ड शुरुआत में गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए सोचा गया था, लेकिन इसके दायरे को केवल फिलिस्तीनी क्षेत्र तक सीमित नहीं किया गया है।
चार्टर के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस की अध्यक्षता स्वयं डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसे एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित या संकटग्रस्त क्षेत्रों में स्थिरता लाना, भरोसेमंद और कानूनी शासन बहाल करना तथा स्थायी शांति सुनिश्चित करना है। यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप शांति निर्माण से जुड़े कार्य करेगा।
ट्रंप न केवल अध्यक्ष होंगे, बल्कि अमेरिका के प्रतिनिधि के रूप में भी अलग से कार्य करेंगे। चार्टर में उन्हें सहायक संस्थाओं के गठन, संशोधन या भंग करने का विशेष अधिकार दिया गया है। वे एक कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों का चयन करेंगे, जिन्हें “वैश्विक स्तर के नेता” बताया गया है और जिनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा। अध्यक्ष को केवल स्वैच्छिक इस्तीफे या अक्षमता की स्थिति में ही बदला जा सकेगा।
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सदस्यता केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर मिलेगी और देशों का प्रतिनिधित्व उनके राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख करेंगे। सामान्यतः सदस्यता अवधि तीन वर्ष की होगी, लेकिन जो देश पहले वर्ष में एक अरब डॉलर से अधिक का योगदान देंगे, उन पर यह सीमा लागू नहीं होगी। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सदस्यता के लिए अनिवार्य वित्तीय योगदान नहीं होगा।
कार्यकारी बोर्ड में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद जैरेड कुश्नर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, उद्योगपति मार्क रोवन, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के करीबी सहयोगी रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं।
चीन, रूस, यूक्रेन, इज़राइल, यूएई और कनाडा समेत कई देशों को आमंत्रण भेजा गया है। वहीं फ्रांस ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है, जबकि ब्रिटेन और यूक्रेन ने रूस की भागीदारी पर चिंता जताई है।
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