नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर घाटी छोड़कर गए कश्मीरी पंडितों से “अपने घर” लौटने की अपील की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित स्थायी रूप से घाटी में वापस आ पाएंगे। उनका मानना है कि अधिकांश लोग अब देश के अन्य हिस्सों में बस चुके हैं और वहीं उनका जीवन स्थापित हो गया है।
सोमवार को जम्मू में पार्टी के दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “वो तो विज़िटर्स की तरह आएंगे। मुझे नहीं लगता कि वे यहां स्थायी रूप से रहने आएंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीरी पंडितों की वापसी का मुद्दा भावनात्मक जरूर है, लेकिन जमीनी हकीकत को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले कश्मीरी पंडितों को स्वयं यह तय करना होगा कि वे लौटना चाहते हैं या नहीं, क्योंकि वे देश के अलग-अलग हिस्सों में बस चुके हैं। कई लोग उम्रदराज हो चुके हैं और उन्हें नियमित चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है। वहीं, उनके बच्चे देश के विभिन्न शहरों में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में अचानक सब कुछ छोड़कर घाटी में स्थायी रूप से बसना आसान नहीं है।
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फारूक अब्दुल्ला ने यह भी संकेत दिया कि कश्मीरी पंडितों की वापसी केवल सुरक्षा का ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक स्थिरता का भी सवाल है। उन्होंने कहा कि घाटी से उनका रिश्ता आज भी भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल गई हैं।
उन्होंने यह दोहराया कि कश्मीर सभी का है और कश्मीरी पंडितों का वहां पूरा हक है। हालांकि, मौजूदा हालात में उनकी स्थायी वापसी की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं लगता।
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