कर्नाटक के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री एसवी रामचंद्र गौड़ा का मंगलवार को बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने सुबह 6:20 बजे चंद्रा लेआउट स्थित निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
रामचंद्र गौड़ा का अंतिम संस्कार कामाक्षीपाल्या स्थित उनके निजी आवास पर किया जाएगा, जहां परिवार के सदस्यों के साथ राजनीतिक नेता, समर्थक और शुभचिंतक उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने रामचंद्र गौड़ा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने दशकों पुराने साथी और भाई को खो दिया है। येदियुरप्पा ने कहा कि जनसंघ के दौर से लेकर भाजपा को राज्य में मजबूत बनाने तक दोनों नेताओं ने साथ मिलकर काम किया। उन्होंने रामचंद्र गौड़ा की प्रशासनिक क्षमता और पार्टी के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनका निधन व्यक्तिगत रूप से उनके लिए और पार्टी के लिए बड़ी क्षति है।
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रामचंद्र गौड़ा कर्नाटक भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। उन्होंने कई दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वह उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, रेशम उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, लघु बचत तथा खनन एवं भूविज्ञान जैसे विभागों के मंत्री रहे।
उन्होंने एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली भाजपा-जेडीएस गठबंधन सरकार में भी मंत्री के रूप में काम किया। बाद में बीएस येदियुरप्पा सरकार में वह चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कर्नाटक में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया गया था।
रामचंद्र गौड़ा का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभावित होकर उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। हाईस्कूल के समय उन्होंने गोवा मुक्ति आंदोलन में भी हिस्सा लिया।
1970 में वह जनसंघ के सदस्य के रूप में बेंगलुरु नगर निगम में पहुंचे और उसी वर्ष सिटी इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य चुने गए। उन्होंने भाजपा के संगठन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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