फ्रांस ने भारत को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अपना विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव सौंप दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को भारतीय वायुसेना की भविष्य की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सौदे में भारत में बड़े पैमाने पर राफेल विमानों के निर्माण और उत्पादन की योजना भी शामिल है।
राफेल विमान भविष्य में भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल होंगे। इन विमानों का चयन रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2012 में लंबी वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया था। रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्रांस ने भारत की ओर से जारी लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (एलओआर) के जवाब में 114 मल्टीरोल राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है।
इस प्रस्ताव की वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण विभाग और भारतीय वायुसेना द्वारा समीक्षा की जा रही है। भारतीय पक्ष विशेष रूप से इस बात का मूल्यांकन करेगा कि विमान में स्वदेशी हथियार प्रणालियों, जैसे अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विभिन्न संस्करणों और भारतीय तकनीक को किस स्तर तक शामिल किया जा सकता है।
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94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा
प्रस्ताव के अनुसार, 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके लिए फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनियां भारतीय उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर काम करेंगी। इसमें राफेल निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन, मिसाइल निर्माता एमबीडीए, इंजन निर्माता सफ्रान और रक्षा तकनीक कंपनी थेल्स शामिल होंगी।
इस सौदे से भारतीय रक्षा उद्योग को लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर मिलने की संभावना है। इसमें टाटा, लार्सन एंड टुब्रो जैसी भारतीय कंपनियों को भी बड़े अवसर मिल सकते हैं।
भारत के पास 200 से ज्यादा राफेल होने की संभावना
भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले ही 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। नए 114 विमानों की खरीद के बाद भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 176 तक पहुंच सकती है। वहीं, भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा जरूरतों के लिए 31 और राफेल विमानों को शामिल करने की इच्छा जताई है, जिससे भविष्य में देश में राफेल विमानों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है।
भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को देखते हुए यह सौदा बेहद अहम माना जा रहा है। पुराने मिग लड़ाकू विमानों की सेवानिवृत्ति और स्वदेशी एलसीए मार्क-1ए तथा एलसीए मार्क-2 के शामिल होने में देरी के कारण वायुसेना अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने करीब पांच महीने पहले भारतीय वायुसेना के 114 राफेल विमानों की खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह सौदा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और वायु शक्ति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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