अमेरिका में नारीवादी आंदोलन की सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित आवाजों में शामिल ग्लोरिया स्टाइनम का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए लंबे समय तक सक्रिय रहीं। स्टाइनम ने पत्रकारिता और सामाजिक आंदोलन के जरिए अमेरिका में महिला अधिकारों की बहस को नई दिशा दी।
ग्लोरिया स्टाइनम को अमेरिकी नारीवादी आंदोलन की प्रमुख हस्तियों में गिना जाता है। उन्होंने महिलाओं के सामने मौजूद सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाया। उनकी लेखनी और भाषणों ने बड़ी संख्या में महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
स्टाइनम ‘Ms.’ पत्रिका की सह-संस्थापक भी थीं। इस पत्रिका ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों, समान अधिकारों और नारीवादी विचारों को प्रमुखता से सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पत्रकारिता को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रहीं।
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अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में स्टाइनम ने समान वेतन, प्रजनन अधिकार, राजनीतिक भागीदारी और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव जैसे मुद्दों पर अभियान चलाए। वह महिलाओं के अधिकारों के साथ-साथ व्यापक सामाजिक सुधारों की भी समर्थक थीं।
उनकी पहचान केवल एक कार्यकर्ता के तौर पर नहीं, बल्कि लेखिका, पत्रकार और सार्वजनिक वक्ता के रूप में भी रही। अमेरिकी समाज में महिलाओं की भूमिका और अधिकारों को लेकर उनके विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा।
92 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ अमेरिकी नारीवादी आंदोलन ने अपनी सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक को खो दिया। उनके दशकों लंबे संघर्ष और योगदान को महिला अधिकारों के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
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