तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। कोलकाता स्थित उनके कालीघाट आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही पहुंचे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष और कथित बगावत की अटकलों को हवा दे दी है।
टीएमसी के पास वर्तमान में 42 सांसद हैं, जिनमें 29 लोकसभा और 13 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के 80 विधायक हैं। इसके बावजूद बैठक में बेहद कम जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।
बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में बीना मंडल, अशीमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल थे। वहीं सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय मौजूद रहे।
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हालांकि, पार्टी ने तुरंत सफाई जारी करते हुए कहा कि यह सभी सांसदों और विधायकों की बैठक नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक थी। टीएमसी के अनुसार, महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी जैसे कई सदस्य वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए थे।
रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी में असंतोष का नेतृत्व निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि उन्हें कई विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे विधानसभा में पार्टी के भीतर विभाजन की स्थिति बन गई है।
संसद में भी कुछ टीएमसी सांसद नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं और उनके भाजपा में शामिल होने या अलग गुट बनाने की चर्चाएं हैं। इसी बीच खबरें हैं कि ममता बनर्जी लोकसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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