गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने मंगलवार को निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर काम करने और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता और पद जनता की सेवा करने तथा लोगों के दिलों में जगह बनाने का अवसर देते हैं।
हर्ष सांघवी ने पंचायत कार्यालय के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे हर दिन कम से कम दो घंटे जनता की समस्याएं सुनने के लिए निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व लोगों की परेशानियों को समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाना है।
उपमुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से यह भी कहा कि वे सप्ताह में कम से कम पांच दिन गांवों का दौरा करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करने से स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
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उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। सांघवी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांवों और आम नागरिकों के बीच लगातार रहकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों पर भरोसा जताकर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है। इस जिम्मेदारी को ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना जरूरी है। पद और अधिकार को व्यक्तिगत लाभ के बजाय समाज की सेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
डिप्टी सीएम ने पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासन और नागरिकों के साथ मजबूत संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से जनता के बीच जाने से विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सकेगा।
सांघवी ने प्रतिनिधियों से ग्रामीण विकास को गति देने, लोगों की शिकायतें सुनने और प्रशासन तथा जनता के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनसेवा के माध्यम से ही प्रतिनिधि लोगों के बीच विश्वास और सम्मान कायम कर सकते हैं।
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