गुजरात में एक किसान ने कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पलसाना तालुका के अंभेती गांव के निवासी कमलेश पटेल ने प्राकृतिक खेती को अपनाने के साथ-साथ अब जैविक खाद ‘घनजीवामृत’ का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन शुरू किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कमलेश पटेल केवल स्वयं प्राकृतिक खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य देश को रासायनिक उर्वरकों के आयात पर निर्भरता से मुक्त करना भी है। उनका मानना है कि यदि किसान जैविक विकल्पों की ओर बढ़ें, तो न केवल खेती की लागत कम होगी बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
‘घनजीवामृत’ एक पारंपरिक जैविक खाद है, जिसे गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और अन्य प्राकृतिक तत्वों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाकर उसकी उर्वरता सुधारने में मदद करता है। कमलेश पटेल ने इस पारंपरिक पद्धति को आधुनिक तकनीक और बड़े उत्पादन मॉडल के साथ जोड़कर इसे व्यावसायिक स्तर पर पहुंचाया है।
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उनकी इस पहल से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि देश की कृषि आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करती हैं।
सरकार भी लगातार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चला रही है, ताकि किसानों की आय बढ़े और मिट्टी की सेहत बनी रहे। कमलेश पटेल की यह पहल गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
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