गुरुग्राम नगर निगम ने स्थानीय शासन में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए वार्ड समितियों के गठन को मंजूरी दे दी है। नगर निगम का कहना है कि इन समितियों के गठन से स्थानीय समस्याओं पर लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। हालांकि, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) ने इस फैसले को लेकर संदेह जताया है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 के कानून के तहत नगर निगमों में वार्ड समितियों का गठन अनिवार्य है, ताकि नागरिक स्थानीय प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इसके बावजूद 2022 के अंत से अब तक गुरुग्राम में कोई वार्ड समिति गठित नहीं की गई थी। नगर निगम चुनावों को हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है और अब जाकर इस दिशा में औपचारिक स्वीकृति दी गई है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वार्ड समितियों के माध्यम से सड़क, पानी, सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सीधे वार्ड स्तर पर उठाया जा सकेगा। इससे समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और जनता की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचेगी।
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वहीं, कई आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले भी ऐसे कई प्रावधान कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। उनका आरोप है कि यदि समितियों को पर्याप्त अधिकार, संसाधन और नियमित बैठकें नहीं दी गईं, तो यह पहल केवल औपचारिक बनकर रह जाएगी। कुछ आरडब्ल्यूए ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि समितियों के सदस्यों का चयन कैसे होगा और क्या आम नागरिकों की राय वास्तव में सुनी जाएगी।
नगर निगम ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और वार्ड समितियों को सक्रिय भूमिका दी जाएगी। अब देखना यह है कि यह फैसला वास्तव में स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करता है या सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाता है।
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