झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने विधेयक को “काला कानून” बताते हुए कहा कि झारखंड के साथ अन्याय और सौतेला व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सोरेन ने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है तो झारखंड के हर जिले, प्रखंड, पंचायत और शहर में इसका जोरदार विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य ऐसा व्यापक आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
‘खनिज और जमीन झारखंड की’
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज और जमीन झारखंड की है, इसलिए दिल्ली को राज्य के अधिकारों और हिस्सेदारी पर फैसला करने का अधिकार क्यों होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने जल्दबाजी में विधेयक पारित कर झारखंड के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया है।
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झारखंड देश के कुल खनिज संसाधनों में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। सोरेन ने इसी आधार पर राज्य के अधिकारों की रक्षा की बात कही।
संसद में पारित हुआ विधेयक
लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी थी, जबकि गुरुवार को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
विधेयक का उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों की शक्तियों को सीमित करना है।
केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राज्यों की स्वायत्तता या राजस्व अधिकारों में हस्तक्षेप करना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र पूरे देश में खनिज दरों में एकरूपता सुनिश्चित करना चाहता है।
रेड्डी ने बताया कि केंद्र कोयला, चूना पत्थर, लौह अयस्क, तांबा और मैंगनीज जैसे प्रमुख खनिजों को विनियमित करना चाहता है, जबकि 49 छोटे खनिजों पर राज्यों के अधिकार बने रहेंगे। उन्होंने कोयले को बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की करीब 73 प्रतिशत बिजली कोयले से पैदा होती है।
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