हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के पशुपालक समुदाय की आजीविका को मजबूत करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘PEHEL’ परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का पूरा नाम ‘सस्टेनेबल स्मॉल रूमिनेंट एंड एम्पावर्ड हिमालयन शेफर्ड्स अंडर पास्टोरलिस्ट्स एम्प्लॉयमेंट इन हिमालयन इकोसिस्टम्स फॉर लाइवलीहुड्स’ है। इसका मुख्य फोकस छोटे जुगाली करने वाले पशुओं के विकास, स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने पर है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि PEHEL परियोजना के माध्यम से पारंपरिक पशुपालन प्रणालियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, ताकि बदलते समय और पर्यावरणीय चुनौतियों के अनुरूप पशुपालकों को बेहतर अवसर मिल सकें।
इस पहल के तहत भेड़, बकरी जैसे छोटे जुगाली करने वाले पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में यह परियोजना रोजगार के नए अवसर सृजित करने, पलायन को रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी। PEHEL परियोजना को राज्य सरकार की ग्रामीण और पर्यावरणीय विकास नीतियों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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