असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि उनकी सरकार अवैध घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच किसी औपचारिक प्रत्यावर्तन संधि का इंतजार नहीं करेगी। गुरुवार (1 जनवरी, 2026) को उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नीति ढांचे के तहत राज्य सरकार “पुशबैक” की प्रक्रिया को और तेज करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए किसी बाहरी समझौते पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार हर साल करीब 10,000 से 15,000 विदेशियों को चिन्हित कर देश से बाहर भेजने की योजना पर काम कर रही है।
हिमंत बिस्वा सरमा ने भरोसा जताया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार तीसरी बार असम में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार विकास के एजेंडे के साथ-साथ राज्य के स्वदेशी लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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मुख्यमंत्री के अनुसार, असम लंबे समय से अवैध घुसपैठ की समस्या से जूझता रहा है, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी, संसाधनों और सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और आने वाले समय में कार्रवाई और तेज होगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नई नीति के तहत सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करने और असम के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, जहां अवैध घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है।
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