असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों के मुद्दे को केवल एक “बहाने” के रूप में इस्तेमाल कर हिंदू धर्म को निशाना बनाते हैं।
सरमा ने राहुल गांधी को महिला अधिकारों का सच्चा समर्थक मानने से इनकार करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर कांग्रेस नेता का रुख कथित तौर पर चयनात्मक है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं से जुड़े विषयों को उठाने के पीछे उनका उद्देश्य वास्तविक सशक्तीकरण के बजाय हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं पर हमला करना है।
असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला अधिकारों और समानता के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को व्यापक और समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं के सशक्तीकरण को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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सरमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब महिला अधिकारों, महिला आरक्षण और सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी इन विषयों को अपने राजनीतिक हितों के अनुसार उठाती है।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के रुख को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि महिला सशक्तीकरण वास्तव में प्राथमिकता है, तो इसे सभी समुदायों और वर्गों के संदर्भ में समान रूप से देखा जाना चाहिए।
वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया का उल्लेख इस खबर में नहीं किया गया है। सरमा के बयान से एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव सामने आया है।
महिला अधिकारों के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच पहले भी कई बार तीखी बहस होती रही है। सरमा ने अपने बयान के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महिला सशक्तीकरण के नाम पर हिंदू धर्म को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जा रहा है।
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