होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और अमेरिकी सख्ती के बावजूद भारत के लिए तेल आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई तेल टैंकर वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करते हुए सफलतापूर्वक मुंबई पहुंच रहे हैं।
अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस अहम समुद्री मार्ग पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, व्यस्त अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग होने के कारण पूर्ण नाकेबंदी लागू करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बावजूद कई जहाज इस क्षेत्र से गुजरने में सफल रहे हैं।
हाल ही में भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ कतर के रास लाफान टर्मिनल से कच्चा तेल लेकर होर्मुज पार करते हुए मुंबई पहुंचा। वहीं, ‘जग अर्नव’ और ‘सनमार हेराल्ड’ जैसे अन्य भारतीय जहाजों को इस क्षेत्र में अलग-अलग घटनाओं का सामना करना पड़ा, जो सुरक्षा जोखिमों को दर्शाता है।
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जानकारी के मुताबिक, इस साल अमेरिकी निगरानी बढ़ने के बाद भी 30 से अधिक टैंकर इस क्षेत्र से गुजर चुके हैं। भारत के करीब 14 जहाज वर्तमान में इस जोन में संचालित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जहाजों के पास कई वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। एक प्रमुख मार्ग ईरान के तट से होते हुए पाकिस्तान के मकरान तट के पास से गुजरता है, जबकि दूसरा मार्ग ईरान के चाबहार बंदरगाह के आसपास से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश कर सीधे भारत के पश्चिमी तट की ओर जाता है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस, के तहत जहाजों को “निर्दोष मार्ग” का अधिकार प्राप्त है, जिससे वे किसी देश के जलक्षेत्र से बिना नुकसान पहुंचाए गुजर सकते हैं।
हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव और राजनीतिक परिस्थितियां इन मार्गों को जोखिमपूर्ण बनाती हैं। कई मामलों में भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और एस्कॉर्ट सहायता भी दी जाती है।
यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक व्यापार के इतने महत्वपूर्ण मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना आसान नहीं है और वैकल्पिक रास्ते हमेशा मौजूद रहते हैं।
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