हिमाचल प्रदेश सरकार ने ₹40,461 करोड़ का अनुपूरक बजट विधानसभा में पारित कर दिया है। इस बजट को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं और आरोप लगाया है कि इसे पारित करने की प्रक्रिया में कई नियमों की अनदेखी की गई है।
विधानसभा में बजट पेश होने के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई गई और जल्दबाजी में इसे मंजूरी दे दी गई। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार को जनता के पैसे के उपयोग को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि अनुपूरक बजट राज्य के विकास कार्यों और आवश्यक योजनाओं को जारी रखने के लिए जरूरी था। उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है।
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इस बजट में विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिसमें बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकास परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि प्रक्रियागत खामियों के कारण इस बजट की वैधता पर सवाल उठते हैं और इसे लेकर आगे भी विरोध जारी रहेगा।
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