भारतीय वायुसेना के साहस और रणनीतिक अभियानों पर आधारित नई किताब “द स्काई वॉरियर्स: ऑपरेशन सिंदूर अनवील्ड” में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए खतरनाक हवाई मिशनों की अनकही कहानियां सामने आई हैं। इस किताब में पायलटों के प्रत्यक्ष अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
बताया गया है कि पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने 7 मई की सुबह पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों में करीब 100 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी दी गई थी।
किताब के अनुसार, मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों को न केवल दुश्मन के हमलों का सामना करना पड़ा, बल्कि खराब मौसम और तकनीकी समस्याओं से भी जूझना पड़ा। एक घटना में ग्रुप कैप्टन कुणाल कालरा अपने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। उस समय आसमान में भारी बादल, बिजली और तेज बारिश थी, फिर भी उन्होंने मिशन जारी रखा।
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मिशन के दौरान उनके कॉकपिट में अचानक तकनीकी चेतावनी दिखाई दी, जो सामान्य स्थिति में मिशन रद्द करने का संकेत देती है। लेकिन कालरा ने जोखिम उठाते हुए मिशन जारी रखने का फैसला किया और निर्धारित स्थान पर पहुंचकर मिसाइल दाग दी।
किताब में एक और घटना का जिक्र है जिसमें ग्रुप कैप्टन मानव भाटिया अपने स्क्वाड्रन के साथ मिशन पर थे। उनके सुखोई-30 एमकेआई विमान में सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल लगी थी। उन्होंने 27 वर्षीय युवा पायलट को मिसाइल दागने का मौका दिया ताकि उसे इस ऐतिहासिक मिशन का अनुभव मिल सके।
जब विमान लक्ष्य के करीब पहुंचा तो पाकिस्तान के रडार सक्रिय थे और खतरा लगातार बना हुआ था। आखिरकार आदेश मिलने के बाद युवा पायलट ने ब्रह्मोस मिसाइल दागी और मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
यह किताब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के साहस, रणनीति और जोखिम भरे फैसलों की रोमांचक झलक पेश करती है।
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