मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि भारत के पास 25 दिनों का कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सूत्रों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो ईरान संकट के बाद करीब 10 प्रतिशत बढ़ चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद किए जाने के कारण कीमतें और बढ़ सकती हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 50 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति मध्य पूर्व से होती है और यह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आती है। हालिया संघर्ष के कारण इस मार्ग से आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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सप्ताहांत में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान में कई ठिकानों पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में तेहरान ने इज़राइल और अमेरिकी बलों की मेजबानी करने वाले देशों — संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन, इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब — पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री कच्चे तेल का निर्यात और करीब 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति गुजरती है।
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी आधी जरूरत इसी मार्ग से पूरी करता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त आपूर्ति प्राप्त कर सकता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 23.7 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया।
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