रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में महाराष्ट्र के शिरडी में आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया कि आने वाले 25 से 30 वर्षों में भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन सकता है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाना होगा तथा रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देना होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 25 से 30 प्रतिशत है, जिसे सरकार बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति और निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
हालांकि, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की 2025 की रिपोर्ट इस लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अभी दुनिया के शीर्ष 25 हथियार निर्यातकों में भी शामिल नहीं है। वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक हथियार निर्यात में 42 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन का स्थान आता है।
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही। भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में रूस, फ्रांस और इज़राइल शामिल हैं।
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह का मानना है कि यदि भारत को रक्षा निर्यात में बड़ी सफलता हासिल करनी है तो अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में भारी निवेश करना होगा। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक हथियारों के विकास, नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक तकनीक के बिना वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास क्षमता तो है, लेकिन अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और इज़राइल जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। बेहतर नीतियों, अनुसंधान और निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत भविष्य में एक प्रमुख रक्षा निर्यातक बन सकता है।
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