केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत को बड़े पैमाने पर तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाना चाहिए, लेकिन इसके साथ मानवीय जिम्मेदारी, सुरक्षा और जनता के भरोसे से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी और फिनटेक तंत्र में दिखाई दे रहा है।
वैश्विक फिनटेक महोत्सव 2026 को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी अवसरों का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि नए मंच, उद्यम और समाधान तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश के तकनीकी विकास और वित्तीय नवाचार को नई गति दे रही है।
वित्त मंत्री ने उन लोगों पर भी सवाल उठाया जो भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को लगातार निराशावादी नजरिये से देखते हैं। हल्के-फुल्के अंदाज में उन्होंने ऐसे आलोचकों को ‘नाराज फूफा जी’ बताया, जो भारत की क्षमता पर संदेह करने के कारण तलाशते रहते हैं।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल पर सीतारमण ने इसे दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि एआई धोखाधड़ी का तेजी से पता लगाने में मदद कर सकता है, लेकिन अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल बड़े और अधिक जटिल वित्तीय धोखों को स्वचालित तरीके से अंजाम देने में भी कर सकते हैं।
उन्होंने एआई के विकास और इस्तेमाल में संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया। उनके अनुसार तकनीकी गति और दक्षता सुरक्षा, पारदर्शिता और मानवीय निगरानी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। नियामकों, निदेशक मंडलों और वरिष्ठ प्रबंधन को एआई के इस्तेमाल, उससे प्रभावित होने वाले फैसलों और संभावित जोखिमों की स्पष्ट समझ होनी चाहिए।
सीतारमण ने साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और उपभोक्ता संरक्षण मजबूत करने तथा नियामकों और नवाचारकर्ताओं के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक से थोक और खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के पायलट कार्यक्रमों को और आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टोकनीकरण और डिजिटल वित्त में बढ़ती गति को देखते हुए सीबीडीसी के दोनों पायलटों का विस्तार जरूरी है। थोक सीबीडीसी वित्तीय संस्थानों के बीच लेनदेन और निपटान को अधिक दक्ष बनाने की संभावनाओं पर केंद्रित है, जबकि खुदरा सीबीडीसी आम लोगों और कारोबारियों के दैनिक डिजिटल भुगतान में इसके इस्तेमाल की संभावनाओं को परखता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र की सफलता को केवल लेनदेन की संख्या या कंपनियों के मूल्यांकन से नहीं मापा जाना चाहिए। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि क्षेत्र कितना भरोसा अर्जित करता है और लोगों की वास्तविक वित्तीय जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करता है।
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