मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के दौरान भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि भारत अपनी ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति पर कायम रहेगा।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और इसके लिए देश को कई भरोसेमंद, सस्ते और बड़े ऊर्जा स्रोतों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को किसी कृत्रिम दबाव या विकृति से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि सभी देशों को निष्पक्ष तरीके से ऊर्जा उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा, “अमेरिका की ट्रंप प्रशासन सरकार अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को खुलकर सामने रखती है। उसी तरह भारत भी ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत पर काम करता है। कई क्षेत्रों में दोनों देशों के हित समान हैं और हम साथ मिलकर काम करते हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद भी हो सकते हैं, जिन्हें हमें संतुलित तरीके से संभालना होगा।”
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जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान कहा था कि अमेरिका भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के विविधीकरण में मदद करने के लिए तैयार है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर है। हालांकि, अमेरिका ने कई बार रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना की है। इसके बावजूद भारत ने हमेशा कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता देगा।
जयशंकर ने दोहराया कि भारत अपने लोगों को सस्ती और सुलभ ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए सबसे उचित कीमत पर विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा।
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