पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और सहयोग को जारी रखने के लिए स्थायी रास्ता तलाश रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद विदेश सचिव ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से चाबहार परियोजना से जुड़ा हुआ है, लेकिन पिछले कई महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का क्षेत्रीय सहयोग और विभिन्न देशों के बीच संबंधों पर असर पड़ा है।
विक्रम मिस्री ने बताया कि चाबहार बंदरगाह पर लागू नियमों और वहां की गतिविधियों को लेकर भी कुछ बदलाव हुए हैं। भारत इन मुद्दों पर सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि परियोजना के लिए टिकाऊ और क्षेत्र के कई हितधारकों के लिए लाभकारी रास्ता निकाला जा सके।
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ईरान ने भारत के रुख की सराहना की
विदेश सचिव के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए भारत के समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि युद्ध को जारी रखना किसी के हित में नहीं है और संघर्ष जितना लंबा चलेगा, उतना ही नुकसान बढ़ेगा।
पेजेश्कियन ने भारत और ईरान के बीच पुराने सभ्यतागत, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति प्रयासों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी संघर्ष शुरू होने के बाद से क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख नेताओं और क्षेत्र के बाहर के कई नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। भारत ने जहां संभव हुआ, वहां संघर्ष समाप्त करने और शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया है।
भारतीय नाविकों की मौत पर जताई चिंता
भारत ने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हुए हमलों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। मिस्री ने कहा कि कुछ घटनाओं में भारतीय नाविकों की जान गई है। भारत ने संबंधित सभी पक्षों के सामने इन घटनाओं पर अपनी चिंता दर्ज कराई है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी क्षेत्रीय समकक्षों के संपर्क में हैं और संघर्ष को समाप्त करने के रास्ते तलाश रहे हैं। वहीं, भारत-ईरान के बीच मौजूदा व्यापार मुख्य रूप से निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ रहा है।
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